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सीतामढ़ी लखनदेई नदी से फिर हटेगा अतिक्रमण

सीतामढ़ी। में लखनदेई नदी के तटबंध को अतिक्रमणमुक्त कराने की पहल शुरू की गई है। जिलाधिकारी रिची पांडेय के निर्देश पर नगर निगम और जल संसाधन विभाग ने 15 दिनों में अवैध निर्माण हटाने का निर्णय लिया है। नदी का पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व है, जिससे…

सीतामढ़ी। शहर के बीचो-बीच बहने वाली लखनदेई नदी जो सीतामढ़ी की जीवनरेखा है। इसके तटबंध को अतिक्रमणमुक्त कराने की एक बार फिर पहल शुरू की गयी है। जिलाधिकारी रिची पांडेय के कड़े निर्देश के बाद नगर निगम और जल संसाधन विभाग ने नदी को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन ने साफ कहा है कि 15 दिनों में रिंग बांध, नदी पेटी और तटबंध क्षेत्रों में बने अवैध निर्माण हटेंगे और किसी को किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी। इसको लेकर अतिक्रमणकारियों को सूचना भी दी जा रही है। साथ ही मार्किंग का भी कार्य शुरू हो गया है।

जिसके बाद कई लोग खुद से ही निर्माण तोड़ना शुरू कर दिया है। वहीं प्रशासन के हाल के दिनों के सख्त रवैया की वजह से कई अतिक्रमणकारी खाली कर रहे है। लखनदेई नदी न केवल शहर की पेयजल और निकासी व्यवस्था का आधार है, बल्कि इसका पौराणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी अतुलनीय है। मान्यता है कि देवी सीता की सखी लखना के नाम पर इस नदी का नाम लखनदेई पड़ा। यह वही पावन धरती है जहाँ जगत जननी मां जानकी का जन्म हुआ और जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोजाना दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नदी की अविरल धारा और स्वच्छ तटों को देखने की इच्छा पर्यटकों में भी बढ़ रही है। अतिक्रमण ने संकीर्ण कर दी नदी, रिंग बांध की सड़क भी जर्जरः नगर निगम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लंबे समय से नदी के दोनों किनारों पर अवैध पक्के कच्चे निर्माण होते गए, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। चार वर्ष पूर्व तो बरसात में अत्यधिक बारिश एवं नेपाल के द्वारा छोड़े गए

पानी के कारण नदी में आयी अत्यधिक जल प्रवाह व बाढ़ के कारण जल अधिग्रहण क्षेत्र में एक इमारत भी जमींदोज हो गया था। इसके बाद भी नदी तट पर अवैध कब्जा नहीं रुक पा रहा है। इसके बाद भी रिंग बांध पर बनी सड़क भी अतिक्रमण की वजह से जर्जर और संकरी हो चुकी है, जिससे आवागमन में परेशानी बढ़ गई है। कई स्थानों पर सड़क पर अतिक्रमण इतना बढ़ गया है कि बड़े वाहनों का गुजरना मुश्किल हो गया है। विशेष टीम गठित, जल संसाधन विभाग करेगा सीमांकनः नगर आयुक्त डॉ. गजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि डीएम के आदेश पर जल संसाधन विभाग को पत्र लिखकर नदी तट और तटबंध का तत्काल सीमांकन कराने का अनुरोध किया गया है। चूंकि नदी और तटबंध जल संसाधन विभाग के अधीन आते हैं, इसलिए स्थानीय अमीन और अंचल अधिकारी के साथ मिलकर विभाग यह बताएगा कि कहां-कहां अतिक्रमण है। सीमांकन पूरा होते ही नगर निगम की गठित टीम, प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी ताकत से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाएगी। 15 दिनों में बड़े अभियान की तैयारी: नगर आयुक्त ने कहा कि 15 दिनों के भीतर रिंग बांध की सड़क, नदी की पेटी तथा नदी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। कचरा डालकर नदी को संकीर्ण करने वाले स्थानों की भी पहचान हो चुकी है। कई स्थानों पर स्थायी निर्माण पाए गए हैं, जिन पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटने के बाद नगर निगम लगातार फॉलो-अप करेगा ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके। रिंग बांध सड़क निर्माण से शहर को मिलेगी बड़ी राहत: नगर आयुक्त ने कहा रिंग बांध सड़क का टेंडर फाइनल हो चुका है और बुडको शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरु करने वाली है। गौशाला चौक से पासवान चौक होते हुए पोस्टमार्टम हाउस तक बनने वाली इस सड़क के तैयार हो जाने के बाद शहर का ट्रैफिक दबाव काफी कम होगा। कई मुख्य सड़कों पर पड़ने वाली भीड़ इस रिंग रोड  पर शिफ्ट हा सकगा। रिंग बाध हाकर बाजार, जानका मदार व पुनौरा मंदिर की ओर आवागमन आसान हो जाएगा। नगर आयुक्त ने कहा कि सीतामढ़ी जगत जननी मां जानकी की जन्मभूमि है। यहां आने वाले हजारों श्रद्धालु अब स्वच्छ और सुंदर नदी तट का भी दर्शन कर सकेंगे। शहर की पहचान और पर्यटन दोनों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। लेखक के बारे में