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सीतामढ़ी; सदर हॉस्पिटल चिकित्सकों की कमी से परेशानी रोजाना 300 मरीजों का इलाजचिकित्सकों की कमी से परेशानी रोजाना 300 मरीजों का इलाज

सीतामढ़ी। के डुमरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की संख्या 250-300 प्रतिदिन है, जबकि जगह की कमी और चिकित्सकों की कमी से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल पुराने भवन में संचालित हो रहा है, जिससे अव्यवस्था बनी रहती है। नए भवन का निर्माण जल्द शुरू…

सीतामढ़ी। जिला मुख्यालय डुमरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ओर अस्पताल वर्षों पुराने सीमित भवन में संचालित हो रहा है, जहां जगह की भारी कमी के कारण मरीजों और कर्मियों दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर, चिकित्सकों की कमी के बावजूद यहां रोज 250-300 मरीजों का इलाज होता है और प्रसव सेवाओं में पीएचसी बेहतर प्रदर्शन करती नजर आती है। अस्पताल पुराने भवन में होने के कारण अधिकांश विभाग तंग कमरों में सिमटे हैं। इलाज, टीकाकरण, प्रसव और आपात सेवाएं एक ही परिसर में संचालित होने से अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि जगह की कमी से कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पाते। हालांकि नए भवन के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है और कार्य जल्द शुरु होने की उम्मीद जताई जा रही है।

चिकित्सकों का अभाव, डेपुटेशन पर टिकी सेवाः पीएचसी में मूल रूप से केवल प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अक्षय कुमार और आयुर्वेद चिकित्सक सृष्टि कुमारी ही पदस्थापित हैं। अन्य चार एलोपैथिक और दो महिला चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर पीएचसी में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद ओपीडी में रोज 250-300 मरीज पहुंचते हैं। शनिवार को भी 197 मरीजों का इलाज किया गया। डॉ. मनीष चंद्र ने बताया कि स्टाफ की कमी के बावजूद मरीजों को रेफर करने की संख्या न्यूनतम रखने की कोशिश की जाती है। वाईटल केस आने पर आसपास के चिकित्सक भी सहयोग के लिए पहुंच जाते हैं। वे कहते हैं यहां रेफर करने वाले मरीजों की संख्या नगण्य के बराबर है। मरीजों की शिकायतें भी कम नहीं: कई मरीजों ने बताया कि सुबह से ही अस्पताल में भीड़ अधिक हो जाती है। जहां बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रामपुर परोरी के एक गर्भवती माता के परिजन रामेश्वर प्रसाद ने बताया अपने मरीज को प्रसव के लिए शुक्रवार को ही रात में आए थे। जहां मरीज को तो किसी तरह बेड मिल गया। लेकिन मुझे रातभर बाहर ठंड में गुजर करना पड़ा। प्रसव के दौरान जगह की कमी रहती है। महिला कर्मियों ने बताया कई बार अधिक प्रसव के मरीज होने पर सबों को व्यवस्थित करने में जगह के अभाव में काफी परेशानी होती है। जहां इमरजेंसी में जगह न मिल पाने पर दिक्कतें उन्हें अक्सर झेलनी पड़ती हैं। हलाकि मरीजों ने इलाज को संतोषजनक बताते हैं। लोग कहते हैं नवीन भवन से बदल जाएगी तस्वीर। स्थानीय लोगों की राय है कि नया भवन बनते ही पीएचसी की क्षमता और सेवा दोनों में व्यापक सुधार आएगा। स्वास्थ्य विभाग ने भी नए निर्माण को प्राथमिकता सूची में रखा है। जहां स्थायी समाधान के लिए नए भवन और पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अक्षय कुमार कहते हैं कि भवन व संसाधनों की कमी के बावजूद हम मरीजों को सर्वोत्तम सेवा देने का प्रयास करते हैं।