Fri. Aug 29th, 2025

इंजीनियर विनोद राय के पटना आवास पर EOU की छापेमारी से उसकी काली कमाई का पोल खुल गया है। उनकी पोस्टिंग सीतामढ़ी में है। वहां के ठेकेदारों ने चौकाने वाले खुलासे किए हैं। ठेकेदारों के अनुसार हर प्रोजेक्ट पर इंजीनियर का 4 से 6 प्रतिशत तक कमीशन तय था। इंजीनियर उन्हें बताता था कि ये पैसे वह ‘ऊपर’ तक पहुंचाता

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की हालिया छापेमारी ने जिले समेत पूरे बिहार प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार राय के पटना स्थित आवास से भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी ने यह साफ कर दिया कि किस तरह विभागीय तंत्र में भ्रष्टाचार गहराई तक पैठ बना चुका है। यह कार्रवाई न सिर्फ विभागीय धांधली की परतें खोलती है, बल्कि यह भी उजागर करती है। कि सत्ता और रसूख के सहारे अधिकारी कैसे वर्षों तक वसूली का खेल खेलते रहे।

ठेकेदारों के खुलासे
सीतामढ़ी के कई ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विनोद कुमार राय की तैनाती लगभग तीन साल पहले जिले में हुई थी। इससे पहले वे शिवहर में एसडीओ थे और फिर सीतामढ़ी में कार्यपालक अभियंता बने। हाल ही में उन्हें अधीक्षण अभियंता का पद मिला। ठेकेदारों का कहना है कि उनकी तेज़ तरक्की के पीछे बिहार सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री से गहरे रिश्ते थे। एक ठेकेदार ने बताया कि बिना कमीशन दिए टेंडर पास होना नामुमकिन था। उनका तय “रेट” 4 से 6 प्रतिशत तक होता था, जबकि बड़े प्रोजेक्ट पर यह दर और भी अधिक वसूली जाती थी। हाल के एक चार करोड़ रुपये के टेंडर में उन्होंने सीधे 4 प्रतिशत कमीशन लिया था।

पैसा ऊपर तक जाता था
एक अन्य ठेकेदार ने दावा किया कि विनोद राय यह साफ कहते थे कि पैसा केवल उनके पास नहीं रुकता, बल्कि “ऊपर” तक जाता है। यही वजह थी कि ठेकेदार भी दबाव में भुगतान करते थे। गुरुवार को भी कई ठेकेदार अपने हिस्से का पैसा देने पटना पहुंचे थे। लेकिन किस्मत ने करवट ली और उसी दिन ईओयू की टीम ने उनकी गाड़ी और घर को घेर लिया।मधुबनी से पटना तक का सफरजानकारी के अनुसार, विनोद कुमार राय गुरुवार को दिन के करीब 11:30 बजे मधुबनी से इनोवा कार पर सवार होकर निकले। सीतामढ़ी होते हुए वे पटना पहुंचे। बताया जा रहा है। कि उनकी गाड़ी में करीब चार करोड़ रुपये नकद थे। शाम सात बजे जब वे पटना स्थित अपने आवास पहुंचे तो इस बीच नोटों को कई जगहों पर खपाने की कोशिश की। सूत्रों का कहना है। कि इस रकम का बड़ा हिस्सा टेंडर और बिल पास करने के एवज में लिया गया था और इसे कुछ सफेदपोश नेताओं तक पहुंचाने की तैयारी थी।

ईओयू की गुप्त कार्रवाई
आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि विनोद राय बड़ी मात्रा में नकदी लेकर पटना जा रहे हैं। सूचना पुख्ता लगने पर ईओयू की विशेष टीम ने तेजी से कदम बढ़ाया और अगमकुआं थाना क्षेत्र के भूतनाथ रोड स्थित उनके आवास पर देर शाम छापेमारी की। तलाशी के दौरान वहां अवैध रूप से अर्जित नकदी का ज़खीरा बरामद किया गया। बताया जाता है कि कुछ रकम उनकी इनोवा कार से भी मिली।

जांच की गहराई
ईओयू के डीजी नैयर हसनैन खान ने बताया कि फिलहाल जांच के लिए दो विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो सीतामढ़ी और समस्तीपुर में काम कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ सकती हैं। इस कार्रवाई ने कई सफेदपोशों की नींद उड़ा दी है। क्योंकि माना जा रहा है कि विनोद राय केवल मुखौटा थे और असली खेल परदे के पीछे से चलता था।

जिले में चर्चा
इस पूरी कार्रवाई ने सीतामढ़ी और आसपास के जिलों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि ठेकेदारों की मजबूरी और सिस्टम की कमजोरी ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। आम जनता का कहना है कि सड़क और भवन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। और अब समझ में आता है कि योजनाओं का लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाता था।

बता दें कि गुरुवार यानी गत 21 अगस्त को अधीक्षण अभियंता ई. विनोद कुमार अपने वाहन से अपने मधुबनी स्थित कार्यालय से सीतामढ़ी कार्यालय पहुंचे थे। इनके साथ वाहन में एकमात्र ड्राइवर ही था। मुख्यालय डुमरा शंकर चौक स्थित अपने कार्यालय में पहुंचे। अधीक्षण अभियंता जल्दी में थे। वे अपने कार्यालय के चैंबर में पहुंचे। यहां बेलसंड से संबंधित चार डीपीआर पर साइन किया। फिर कार्यालय कर्मियों को निर्देश दिए। इस दौरान कार्यालय कर्मियों ने शिकायत की थी कि उनका वेतन भुगतान लंबित है। इस पर अधीक्षण अभियंता ने आश्वासन दिया था कि एचआरएमएस (हह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) में उनके हस्ताक्षर के नमूना का बंद पड़ा ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंत विनोद कुमार राय ने 14 जुलाई को सीतामढ़ी में किया था योगदान, तब से मात्र तीन दिन ही यहां के कार्यालय में दिए थे दर्शन अनुमोदन नहीं हुआ है। हस्ताक्षर नमूना अनुमोदन होने के साथ ही वेतन भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद कार्यालय में पानी पिया और अपने वाहन के चालक को इशारा करते हुए पटना चलने की बात कही। इसके बाद वे अपने वाहन में सवार होकर पटना के लिए निकल पड़े।