Fri. Aug 29th, 2025

सीतामढ़ी के धान उत्पादक किसान इन दिनों बारिश की कमी से परेशान हैं। भादो मास में बारिश नहीं होने से खेतों में धान के पौधे सूखने लगे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, इस साल एक लाख से अधिक हेक्टेयर में…

सीतामढ़ी। प्रकृति की मार से इस बार जिला के धान उत्पादक किसान को इन दिनों तबाही झेलनी पड़ रही है। सावन के बाद भादो मास में भी बारिश ने इस बार इस तरह दगा दिया है कि खेतों में लगे धान के पौधे पानी के अभाव में पीला होने लगे है। अधिकांश खेतों में तीन से चार इंच पानी के नहीं लगे होने के चलते विभिन्न प्रकार के खरपतवार तेजी से उगने लगे है। कृषि विभाग की माने तो इस साल जिले में एक लाख सात हजार 457 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुआ है। लेकिन इस भादो माह में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की पत्तियां सूखने लगे है।

हालांकि सावन माह में किसानों ने अपनी धान की फसल को बचाने के लिए पंपसेट से सिंचाई किया था। किसानों को उम्मीद थी कि भादो माह में भरपूर बारिश होगी। लेकिन अचानक बारिश की कमी ने फिर परेशानी में डाल दिया है। किसान अमर सिंह, भारत सिंह, संतोष शर्मा, राजकुमार ठाकुर, नवीन सिंह, विवेक शर्मा आदि ने बताया कि आकाश से पानी की बूंदे नहीं गिरने से धान की पैदावार प्रभावित होने की संभावना बन रही है। खेत में खरपतवार नाशक दावों का करें छिड़काव : कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय सह प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि विपरीत परिस्थिति में भी किसान लक्ष्य के मुताबिक धान की खेती किए है। बीच-बीच में हो रही लगातार बारिश से धान फसल का ग्रोथ अब तक सही है। बताया कि जिस धान की खेतों में खरपतवार उगे है। वहां किसान या तो परंपरागत तरीके से धान की निकौनी करवाये। नहीं तो खरपतवार नाशक दवा की छिड़काव करने से खरपतवार समाप्त हो जाएगा।