Fri. Aug 29th, 2025

कुछ अधिकारी और कर्मी योजनाओं की राशि को सरकारी रेवड़ी समझ लेते हैं और बेहिचक उस राशि को गपागप खाने लगते है। वे भूल जाते हैं कि रेवड़ी खानी महंगी भी पड़ सकती है। सीतामढ़ी में यह रेवड़ी यानी सरकारी राशि खाने (गबन) के मामले में फंसे साहब सोमवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गए। प्राथमिकी होने के करीब छह माह बाद जिला पुलिस ने साहब को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब बारी उन बाबुओं की है, जिन्होंने गबन में साहब का साथ दिया था।

7 लोगों की गिरफ्तारी बाकी

लाखों रूपये गबन के इस मामले में अभी सात लोगों की गिरफ्तारी बाकी है। लाखों के घोटाले के बहुचर्चित इस केस में प्रखंड प्रमुख अर्चना देवी भी फंसी हुई हैं। वह भी प्राथमिकी में अभियुक्त हैं। उनके अलावा छह सरकारी सेवक शामिल हैं। अब इन लोगों पर पुलिस शिकंजा कसेगी। माना जा रहा है कि साहब के दबोचे जाने के बाद घोटाले में बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी भी ताबड़तोड़ होगी और वो जेल जाएंगे। आठ आरोपियों में से पहली ही गिरफ्तारी चर्चा का विषय बन चुकी है।

अब जानिए, क्या था गबन का पूरा खेल

बताया गया है कि परिहार प्रखंड के उप प्रमुख रफी हैदर उर्फ छोटे बाबू ने योजनाओं में गड़बड़ी और राशि के गबन की शिकायत की थी। डीडीसी ने डीटीओ को जांच सौंपी थी। जांच रिपोर्ट पर डीएम ने बीडीओ को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और गबन की राशि की वसूली करने का आदेश दिया था। जांच में पाया गया था कि भगवतीपुर से साकिर के खेत तक नाला उड़ाही का कार्य पहले ही हो चुका था। फिर भी 15 वीं वित्त से उसी काम के नाम पर करीब 10.40 लाख रूपये की निकासी कर ली गई थी। मुजौलिया में सरकारी तालाब के बजाय प्रमुख के निजी तालाब के घाट का निर्माण कार्य कराया गया था और इसमें 5.57 लाख की निकासी की गई थी।

पोखर का घाट बिना बनाए 8 लाख निकाले

बताया गया है कि बेतहा में सरकारी पोखर का उड़ाही कार्य कराया गया, जिसका रकबा कम है, पर उसके अनुपात में अधिक राशि करीब 10 लाख की निकासी की गई थी। हद तो यह कि सुतिहारा पंचायत के अधखन्नी में सरकारी पोखर में घाट का निर्माण कराये बिना ही करीब साढ़े आठ लाख रूपये की निकासी कर ली गई। प्रखंड कार्यालय के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार के नाम पर भी प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं किया गया था।