बिहार के औरंगाबाद जिले के अम्बा थाना के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र कुमार भारती को एसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. वहीं, उनके निलंबन के बाद पुलिस केंद्र में पदस्थापित एसआई नरेंद्र कुमार को अम्बा का थानाध्यक्ष बनाया है. एसपी ने अम्बा थानाध्यक्ष के खिलाफ यह कार्रवाई शराब माफियाओं के साथ गठजोड़ व सरकार के निर्देशों को ताक पर रख उनके लिए काम करने के कारण किया है. एसपी द्वारा किए गए इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.

शराब माफियाओं का दिया था साथ

मिली जानकारी अनुसार अम्बा थाना की पुलिस द्वारा कुछ दिन पहले एक लग्जरी कार से शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई थी. लेकिन पकड़ी गई शराब की थानाध्यक्ष द्वारा बनाई गई सूची में कई तथ्यों को छुपा दिया गया था. थानाध्यक्ष द्वारा जब्ती सूची में की गई गड़बड़ी की सूचना एसपी को प्राप्त हुई.
प्राप्त सूचना के आलोक में एसपी ने इसके जांच का जिम्मा सदर अनुमण्डल पदाधिकारी गौतम शरण ओमी को दी गई. एसडीपीओ सदर द्वारा मामले की जांच की गई और पाया गया कि थानाध्यक्ष ने जान बूझकर शराब माफियाओं को राहत देने का कार्य किया है. एसडीपीओ द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन अवलोकन करने के बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया है.

पहले भी की है कार्रवाई

बता दें कि एसपी ने इससे पहले भी दो थानाध्यक्षों को कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया है. गौरतलब है कि मदनपुर थानाध्यक्ष और मुफस्सिल थानाध्यक्ष द्वारा एक मामले की प्राथमिकी न कर टाल मटोल किया जा रहा था. पीड़ित ने इसकी शिकायत एसपी से मिलकर की. एसपी ने पीड़ित से प्राप्त शिकायत के आलोक में जब इसकी जांच की तो पाया कि पीड़ित द्वारा किया गया शिकायत जायज है और दोनों थानाध्यक्षों द्वारा लापरवाही बरती गई थी.

ऐसे में एसपी ने दोनों थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया. एसपी के इस कार्रवाई से कुछ महीने सब कुछ ठीक था. लेकिन उस घटना से थानाध्यक्ष ने सीख नही ली और दलदल में फंस गए.

प्राप्त सूचना के आलोक में एसपी ने इसके जांच का जिम्मा सदर अनुमण्डल पदाधिकारी गौतम शरण ओमी को दी गई. एसडीपीओ सदर द्वारा मामले की जांच की गई और पाया गया कि थानाध्यक्ष ने जान बूझकर शराब माफियाओं को राहत देने का कार्य किया है. एसडीपीओ द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन अवलोकन करने के बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया है.

पहले भी की है कार्रवाई

बता दें कि एसपी ने इससे पहले भी दो थानाध्यक्षों को कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया है. गौरतलब है कि मदनपुर थानाध्यक्ष और मुफस्सिल थानाध्यक्ष द्वारा एक मामले की प्राथमिकी न कर टाल मटोल किया जा रहा था. पीड़ित ने इसकी शिकायत एसपी से मिलकर की. एसपी ने पीड़ित से प्राप्त शिकायत के आलोक में जब इसकी जांच की तो पाया कि पीड़ित द्वारा किया गया शिकायत जायज है और दोनों थानाध्यक्षों द्वारा लापरवाही बरती गई थी.

ऐसे में एसपी ने दोनों थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया. एसपी के इस कार्रवाई से कुछ महीने सब कुछ ठीक था. लेकिन उस घटना से थानाध्यक्ष ने सीख नही ली और दलदल में फंस गए.

प्राप्त सूचना के आलोक में एसपी ने इसके जांच का जिम्मा सदर अनुमण्डल पदाधिकारी गौतम शरण ओमी को दी गई. एसडीपीओ सदर द्वारा मामले की जांच की गई और पाया गया कि थानाध्यक्ष ने जान बूझकर शराब माफियाओं को राहत देने का कार्य किया है. एसडीपीओ द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन अवलोकन करने के बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया है.

पहले भी की है कार्रवाई

बता दें कि एसपी ने इससे पहले भी दो थानाध्यक्षों को कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया है. गौरतलब है कि मदनपुर थानाध्यक्ष और मुफस्सिल थानाध्यक्ष द्वारा एक मामले की प्राथमिकी न कर टाल मटोल किया जा रहा था. पीड़ित ने इसकी शिकायत एसपी से मिलकर की. एसपी ने पीड़ित से प्राप्त शिकायत के आलोक में जब इसकी जांच की तो पाया कि पीड़ित द्वारा किया गया शिकायत जायज है और दोनों थानाध्यक्षों द्वारा लापरवाही बरती गई थी.

ऐसे में एसपी ने दोनों थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया. एसपी के इस कार्रवाई से कुछ महीने सब कुछ ठीक था. लेकिन उस घटना से थानाध्यक्ष ने सीख नही ली और दलदल में फंस गए.

प्राप्त सूचना के आलोक में एसपी ने इसके जांच का जिम्मा सदर अनुमण्डल पदाधिकारी गौतम शरण ओमी को दी गई. एसडीपीओ सदर द्वारा मामले की जांच की गई और पाया गया कि थानाध्यक्ष ने जान बूझकर शराब माफियाओं को राहत देने का कार्य किया है. एसडीपीओ द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन अवलोकन करने के बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया है.
पहले भी की है कार्रवाई

बता दें कि एसपी ने इससे पहले भी दो थानाध्यक्षों को कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया है. गौरतलब है कि मदनपुर थानाध्यक्ष और मुफस्सिल थानाध्यक्ष द्वारा एक मामले की प्राथमिकी न कर टाल मटोल किया जा रहा था. पीड़ित ने इसकी शिकायत एसपी से मिलकर की. एसपी ने पीड़ित से प्राप्त शिकायत के आलोक में जब इसकी जांच की तो पाया कि पीड़ित द्वारा किया गया शिकायत जायज है और दोनों थानाध्यक्षों द्वारा लापरवाही बरती गई थी.

ऐसे में एसपी ने दोनों थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया. एसपी के इस कार्रवाई से कुछ महीने सब कुछ ठीक था. लेकिन उस घटना से थानाध्यक्ष ने सीख नही ली और दलदल में फंस गए.

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