पटना में बिजली के स्मार्ट मीटर की रफ्तार काबू में नहीं आ रही है। हर दिन कोई न कोई नया कारनामा सामने आ रहा है। पटना में दो ऐसे मामले चौंकाने वाला आए हैं। एक 3 दिन में 3300 रुपए खाता से गायब होने की घटना है तो दूसरे में 9 दिन में 100 रुपए गायब होने का है। दोनों ही मामलों में विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई है। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के पीड़ित डॉक्टर ने तो CM नीतीश कुमार से स्मार्ट मीटर में बड़े खेल का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। कंज्यूमर का कहना है कि बिजली की ऐसी व्यवस्था है जिसमें पैसा कटने के बाद कोई बताने वाला भी नहीं है कि ऐसा क्याें हो रहा है।

डॉक्टर ने CM से की जांच की मांग

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टर रत्नेश चौधरी ने CM नीतीश कुमार से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि 15 अक्टूबर काे उनके बिजली के स्मार्ट मीटर खाते में 5142 रुपया बैलेंस था। 18 अक्टूबर को बैलेंस घटकर 1841 रुपया हो गया। डॉक्टर का कहना है कि 3 दिनों में करीब 3300 रुपए कैसे कटे ? इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं है। डॉक्टर का कहना है कि इतना ही नहीं एप में मंथली कंजम्पशन भी ग़लत दिखाया जा रहा है। डॉ रत्नेश का कहना है कि जो पुराना स्मार्ट मीटर लगा था, उसे भी यही कहकर करीब 5 साल पहले लगाया गया था कि ये सही रीडिंग देगा। तब महीने में 200 से 300 यूनिट ही बिल उठता था। लेकिन अब 461 यूनिट कैसे आ रहा है। यह बड़ा सवाल है। डॉक्टर का कहना है कि जब एक में मंथली एवरेज 317.30 यूनिट है तो 3 दिनों बाद 322.32 यूनिट कैसे हो सकता है। ये तो फिर डेली एवरेज होगा या फिर गलत है। इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।

स्मार्ट मीटर के पीछे बड़ी साजिश

पटना के नाला रोड नरेश का कहना है कि बिजली विभाग का स्मार्ट मीटर पैसे की चोरी कर रहा है। विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि 9 दिन पहले 1000 का बैलेंस डलवाया था और कोई बकाया बैलेंस भी नही था। सोमवार की सुबह 9 दिनों बाद अचानक बिजली गुल हो गई। उनका कहना है कि न तो मैसेज आया न ही पूर्व सूचना दी गई। नरेश का कहना है कि बैलेंस डालने के बाद रिचार्ज का मैसेज तुरंत आता है, बिजली आधे घंटे के बाद और जो सूचना पहले मिलनी चाहिए वो रिचार्ज के आधे घंटे बाद मिल रही है। शिकायत का भी कोई रास्ता नहीं है। कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कंप्लेन करने का भी कोई माध्यम नहीं दिया गया है। कोई जवाब देने वाला नहीं। पहले 1500 महीना का बिल आता था लेकिन अब तो 3000 रुपया भरना पड़ रहा है।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर लड़ाई

बिहार सरकार ने कैबिनेट से पास कर प्रत्येक विधुत उपभोक्ताओं के घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का फरमान जारी किया है। गांव के लोग मीटर कैसे रीचार्ज करेंगे और किस तरह से लड़ाई लड़ेंगे यह बड़ा सवाल है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर में गड़बड़ी को लेकर विधुत उपभोक्ता महासंघ ,बिहार के मुख्यसंरक्षक अखिल भारतीय बाढ़, सुखाड़ और कटाव पीड़ित संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ,जवान किसान मजदूर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राम भजन सिंह यादव लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर से आम लोगों का बिल बढ़ गया है। इसमें कहीं न कहीं गड़बड़ी है। उनका कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाते ही बिल कैसे डबल हो गया है? यह बड़ा सवाल है। आम लोगों को इस व्यवस्था से परेशानी हो रही है। स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी का हर कोई शिकार है। एक तरफ बिहार के मुखिया 15 वर्षों से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बिहार एक गरीब राज्य है । बिना विशेष राज्य का दर्जा दिए या विशेष आर्थिक पैकेज दिए बिहार के गरीबों का जीवन स्तर में सुधार नही लाया जा सकता है। दूसरी तरफ बिजली कंपनियों को गरीबों से लूटने के लिए तैयारी कर रहे हैं। मोर्चा का कहना है कि वह इस लड़ाई को जन जन को साथ लेकर लड़ेगा।

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