बच्चों के द्वारा मोबाइल पर गेम खेलना कोई नई बात नहीं है। हम सभी के घरों में मोबाइल पर गेम खेलते हुए बच्चों को देखा जा सकता है। लेकिन बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलने की लत लग जाए यह अच्छी बात नहीं होती है। कई बार तो इसका भयंकर परिणाम भी देखने और सुनने को मिल जाता है। ताजा मामला बिहार के लखीसराय जिले का है, जहां एक किशोर को पबजी और फ्री फायर गेम की ऐसी लत लग गई कि वो अपनी मां के गहने चुराकर बेचने लगा। यह हैरान कर देने वाला मामला मेदनी चौकी थाना क्षेत्र का है। बताया गया है कि गहनों को बेचकर किशोर ने उन रुपयों को पबजी और फ्री फायर गेम खेलने में लगा दिया। 

जानकारी के अनुसार किशोर अपनी मां के गहने, जिसकी कीमत 50 से 60 हजार रुपए थी, बेचने के लिए निकल पड़ा। गांव के ही एक दुकान पर किशोर अपने दो अन्य साथियों के साथ उन गहनों को लेकर पहुंचा। दुकानदार ने उन गहनों की कीमत 6740 रुपए लगाई। सौदा तय होने के बाद दुकानदार ने पैसे किशोर को दे दिए। पिछले डेढ़ माह से लगातार वह एक-एक कर जेवरातों की चोरी करता था और फिर उसी दुकान में बेच दिया करता था। परिजन इस बात को लेकर परेशान हो रहे थे कि एक के बाद एक गहने घर से गायब कैसे हो रहे हैं।

परिजनों को किशोर पर शक हुआ और उन्होंने सख्ती से पूछताछ की। किशोर ने चोरी की बात स्वीकारी और अपने दो दोस्तों के नामों को भी बताया। तीनों बालकों को लेकर परिजन और ग्रामीणों उस दुकान पर पहुंचे जहां गहने बेचे गए थे। दुकानदार ने पहले तो विरोध जताया, बाद में ग्रामीणों की भीड़ लगने के बाद दुकानदार ने कहा कि हम बच्चों से जेवरात नहीं खरीदते हैं। इस बच्चे के साथ इसका चाचा भी जेवरात बेचने आया था। यह सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए।

बच्चों के द्वारा मोबाइल पर गेम खेलना कोई नई बात नहीं है। हम सभी के घरों में मोबाइल पर गेम खेलते हुए बच्चों को देखा जा सकता है। लेकिन बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलने की लत लग जाए यह अच्छी बात नहीं होती है। कई बार तो इसका भयंकर परिणाम भी देखने और सुनने को मिल जाता है। ताजा मामला बिहार के लखीसराय जिले का है, जहां एक किशोर को पबजी और फ्री फायर गेम की ऐसी लत लग गई कि वो अपनी मां के गहने चुराकर बेचने लगा। यह हैरान कर देने वाला मामला मेदनी चौकी थाना क्षेत्र का है। बताया गया है कि गहनों को बेचकर किशोर ने उन रुपयों को पबजी और फ्री फायर गेम खेलने में लगा दिया। 

जानकारी के अनुसार किशोर अपनी मां के गहने, जिसकी कीमत 50 से 60 हजार रुपए थी, बेचने के लिए निकल पड़ा। गांव के ही एक दुकान पर किशोर अपने दो अन्य साथियों के साथ उन गहनों को लेकर पहुंचा। दुकानदार ने उन गहनों की कीमत 6740 रुपए लगाई। सौदा तय होने के बाद दुकानदार ने पैसे किशोर को दे दिए। पिछले डेढ़ माह से लगातार वह एक-एक कर जेवरातों की चोरी करता था और फिर उसी दुकान में बेच दिया करता था। परिजन इस बात को लेकर परेशान हो रहे थे कि एक के बाद एक गहने घर से गायब कैसे हो रहे हैं।

परिजनों को किशोर पर शक हुआ और उन्होंने सख्ती से पूछताछ की। किशोर ने चोरी की बात स्वीकारी और अपने दो दोस्तों के नामों को भी बताया। तीनों बालकों को लेकर परिजन और ग्रामीणों उस दुकान पर पहुंचे जहां गहने बेचे गए थे। दुकानदार ने पहले तो विरोध जताया, बाद में ग्रामीणों की भीड़ लगने के बाद दुकानदार ने कहा कि हम बच्चों से जेवरात नहीं खरीदते हैं। इस बच्चे के साथ इसका चाचा भी जेवरात बेचने आया था। यह सुनकर सभी लोग भौचक्के रह गए।

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