बीपीएससी पेपर लीक मामले में चल रही ईओयू की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गयी है. अब तक की जांच में यह तय हो गया है कि इस प्रश्न-पत्र लीक मामले के तार आरा के अलावा दूसरे जिलों खासकर उत्तर बिहार के कुछ जिलों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. यह भी स्पष्ट है कि यह काम महज कुछ लोगों या पदाधिकारियों या कर्मियों का नहीं है. बल्कि, इसके पीछे एक पूरा गैंग सक्रिय है, जिसके सरगना और इसमें शामिल सभी लोगों की तलाश तेजी से चल रही है.

इस मामले में संदिग्धों की तलाश के लिए शुक्रवार को पटना, मधुबनी समेत चार जिलों के आधा दर्जन स्थानों पर ईओयू की विशेष टीम ने छापेमारी की. यह कार्रवाई देर शाम तक चलती रही. इस दौरान टीम को कई अहम सुराग मिले हैं, जिसकी जांच चल रही है. इससे जुड़े कई जरूरी पहलुओं पर फिलहाल तफ्तीश चल रही है.

ईओयू आरा के परीक्षा केंद्र वीर कुंवर सिंह कॉलेज से जुड़े कुछ अहम तथ्यों की पड़ताल अभी भी करने में जुटा हुआ है. मसलन, जितने छात्रों के नाम कमरों में सीटो पर बैठने के लिए चस्पा थे, वास्तव में ये सभी छात्र अपने-अपने स्थानों पर बैठे थे या नहीं. इसका क्रॉस वेरीफिकेसन करने में समस्या आ रही है, क्योंकि इस सेंटर पर कोई सीसीटीवी नहीं लगे हुए थे.

इसमें इस बात को लेकर भी आशंका जतायी जा रही है कि कहीं कुछ छात्रों को रॉल नंबर सीरियल से इतर किसी खास स्थान पर बैठा दिया गया था और प्रश्न-पत्र लीक में ये भी शामिल थे. प्रश्न-पत्र लीक करने वाले गैंग से ही केंद्र के स्टैटिक मजिस्ट्रेट से लेकर केंद्राधीक्षक समेत कुछ अन्य लोग जुड़े हुए थे. इस तरह की व्यवस्था कुछ अन्य केंद्रों पर भी हो सकती है.

बीपीएससी पेपर लीक की गुत्थी सुलझाने के लिए ईओयू के एसपी सुशील कुमार की अध्यक्षता में गठित 20 सदस्यीय एसआईटी अब तक तीन दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है. इसमें एक आइएएस अधिकारी से लेकर छात्र, पदाधिकारी, कर्मी से लेकर अन्य कई लोग शामिल हैं.

टीम इस बात के ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है कि प्रश्न-पत्र लीक कहां से हुआ है और सबसे पहले किसने इसे स्कैन करके पीडीएफ फाइल बनायी. किसके इशारे पर यह पूरा खेल हुआ है. परंतु जल्द ही ईओयू इसकी तह तक पहुंच जायेगी और पूरे मामले का खुलासा हो जायेगा.

Input : Prabhat Khabar.

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