इस साल छठ पूजा का आरंभ 08 नवंबर से होगा. ये महापर्व दीपावली के 6 दिन बाद कार्तिक महीने की षष्ठी यानी छठी के दिन मनाया जाता है. इस पर्व की अवधि चार दिन तक होती है और नहाए खाय से शुरू होने वाला यह पर्व सूर्य देव को जल देने के साथ चौथे दिन खत्म होता है. इस दौरान महिलाएं 36 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं. हालांकि व्रत रखना या न रखना व्यक्तिगत चुनाव पर आधारित होता है.

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला यह महापर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का मुख्य पर्व है. इसे बिहार का विशेष त्योहार क्यों कहते हैं आइए जानते हैं.

क्या है कथा –

छठी मइया को सूर्य देव की बहन कहा जाता है जिनकी पूजा मुख्य रूप से इस त्योहार पर होती है. कहते हैं माता कुन्ती के पुत्र अंगराज़ कर्ण जोकि अंग प्रदेश के राजा थे, सूर्य देव की उपासना करते थे. कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे. उनके अंश से ही माता कुन्ती को पुत्र की प्राप्ति हुई थी. कर्ण की देखा-देखी उनकी प्रजा भी सूर्य देवता की उपासना करने लगी. इसे बिहार से विशेष रूप से संबंधित इसलिए मानते हैं कि अंग प्रदेश वर्तमान में भागलपुर में है जो बिहार में स्थित है. यहीं से इस पूजा की शुरुआत हुई थी जो धीरे-धीरे पूरे पूर्वांचल में फैल गई.

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