सरकारी नौकरी का मतलब मौज, लेकिन बिहार में अब ऐसा नहीं होगा। काम में कमजोर पड़ रहे सरकारी सेवकों को हटाने की प्रक्रिया जल्द तेज होगी। सरकार ने सभी विभागों को कहा है कि ऐसे सरकारी सेवकों की पहचान करने के लिए वह विभागीय समिति का गठन करें। उन कर्मियों को सेवा से हटाने के लिए अपनी अनुशंसा सरकार को दें, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके। मुख्यालय के कार्यालयों के अलावा प्रमंडल एवं जिला स्तर पर भी ऐसी समितियां गठित होंगी। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के मुताबिक इस तरह का आदेश पहले भी दिया गया था। लेकिन, अब तक विभाग को समितियों के गठन की जानकारी नहीं मिल सकी है।

सरकारी नौकरी का मतलब मौज, लेकिन बिहार में अब ऐसा नहीं होगा। काम में कमजोर पड़ रहे सरकारी सेवकों को हटाने की प्रक्रिया जल्द तेज होगी। सरकार ने सभी विभागों को कहा है कि ऐसे सरकारी सेवकों की पहचान करने के लिए वह विभागीय समिति का गठन करें। उन कर्मियों को सेवा से हटाने के लिए अपनी अनुशंसा सरकार को दें, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके। मुख्यालय के कार्यालयों के अलावा प्रमंडल एवं जिला स्तर पर भी ऐसी समितियां गठित होंगी। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के मुताबिक इस तरह का आदेश पहले भी दिया गया था। लेकिन, अब तक विभाग को समितियों के गठन की जानकारी नहीं मिल सकी है।

कौन कर्मी हटाए जाएंगे

गजट के मुताबिक 50 की उम्र पार कर चुके ऐसे सरकारी सेवक काम से हटाए जाएंगे, जिनकी कार्यदक्षता संतोषप्रद नहीं है। उन्हें सेवा में बनाए रखना लोकहित में नहीं है। यह उन कर्मियों पर लागू होगा, पहली नियुक्ति की तिथि से जिनकी सेवावधि 21 वर्ष पूरी हो चुकी है। बिहार सेवा संहिता में भी इसका प्रविधान है। इसके मुताबिक सरकारी सेवा से हटाए गए कर्मियों को तीन महीने की नोटिस या तीन महीने का वेतन दिया जाएगा। फिलहाल क, ख, ग और अवर्गीकृत समूह के कर्मियों को समीक्षा के दायरे में रखा गया है। समूह क के कर्मियों की समीक्षा अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिक की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। अपर सचिव या संयुक्त सचिव की अध्यक्षता वाली समिति समूह ख के सेवकों के बारे में निर्णय लेगी। समूह ग एवं अवर्गीकृत कर्मियों के बारे में निर्णय लेने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।

सत्यनिष्ठा सर्वोच्च

समितियां जिन मानकों पर किसी सेवक को हटाने की अनुशंसा करेगी, उसमें सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यानी संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मी बिना किसी और कारण के हटाए जा सकते हैं। कार्यदक्षता को दूसरा मानक बनाया गया है। इसके अलावा समीक्षा के दौरान किसी सेवक के पिछले पांच साल का सेवा इतिहास भी देखा जाएगा। इसमें उनके कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन और चारित्रिक पुस्तिका में दर्ज टिप्पणी पर गौर किया जाएगा। समिति की अनुशंसा की समीक्षा के बाद नियुक्ति प्राधिकार के पास उसे भेजी जाएगी। संबंधित सेवक को हटाए जाने की जानकारी नियुक्ति प्राधिकार से मिलेगी।

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