सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक में भोजपुरी और मैथिली भाषा में पढ़ाई इसी सत्र से शुरू होगी. इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है. सभी विषयों के शिक्षक मैथिली और भोजपुरी भाषी बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ायेंगे. इन दोनों भाषाओं में विज्ञान, गणित के अलावा हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू को भी पढ़ाने के लिए वर्कबुक तैयार कर ली गयी है. नयी शिक्षा नीति के तहत इसकी शुरुआत की जा रही है.

अभ्यास पुस्तिकाएं तैयार की गयी

शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक जिन बच्चों की घर की भाषा भोजपुरी और मैथिली है, उसके लिए ऐसी अभ्यास पुस्तिकाएं तैयार की गयी हैं. इससे बच्चे समझ पायेंगे कि हिंदी, अंग्रेजी अथवा उर्दू के किसी शब्द का मायने उसकी मातृभाषा में क्या है. यही स्थिति विज्ञान और गणित विषय की है. जैसे ही बच्चा विभिन्न विषयों को अपनी घर की भाषा में समझेगा, उसकी पकड़ न केवल विषय, बल्कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों में हो जायेगी.

अलग से सिलेबस भी तैयार कर रहा है

कक्षा चार और पांच में ऐसे बच्चों की तलाश की जा रही है, जिनकी भाषा और गणित आदि विषयों पर पकड़ कमजोर है. उन्हें उनकी अथवा घर की भाषा में पढ़ाया जायेगा. बिहार शिक्षा परियोजना इसके लिए बाकायदा सर्वे शुरू करने जा रहा है. फिलहाल बिहार एससीइआरटी इन कक्षाओं के लिए अलग से सिलेबस भी तैयार कर रहा है. विशेष यह कि बच्चों की मांग के हिसाब से वर्क बुक स्कूलों में भेजी जायेगी.

26,852 शिक्षा सेवकों का होगा तबादला

महादलित, दलित, अल्पसंख्यक व अति पिछड़ा वर्ग अक्षर आंचल योजना और तालीमी मरकज से जुड़े शिक्षा सेवकों को एक माह के अंदर दूसरी पंचायतों अथवा सेंटरों पर भेजा जायेगा. इस तरह 26,852 शिक्षा सेवकों का तबादला होगा. ये आठ से नौ सालों से एक ही जगह पर जमे हैं.

योजना में आयी जड़ता को खत्म करने का प्रयास

दरअसल, शिक्षा विभाग चाहता है कि इनके सेंटर बदल कर योजना में आयी जड़ता को खत्म किया जाये. तबादले का यह निर्णय बिहार टेक्स्ट बुक कमेटी भवन के सभागार में मंगलवार को जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (साक्षरता) और राज्य संसाधन समूह के सदस्यों की हुई बैठक में लिया गया. जन शिक्षा के निदेशक सह विशेष सचिव सतीश चंद्र झा ने बैठक के दौरान ही इस संबंध में निर्देश भी जारी किये.

26 हजार 856 शिक्षा सेवक कार्यरत

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 26 हजार 856 शिक्षा सेवक कार्यरत हैं. इनका काम उस टोले के बच्चों को कोचिंग देना और प्रारंभिक स्कूलों की मुख्यधारा से जोड़ना है. इसके साथ ही शिक्षा सेवक उस टोले की 15-45 उम्र की असाक्षर महिलाओं में कार्यात्मक साक्षरता बढ़ाने में योगदान देते हैं.

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