एक बार फिर फर्स्ट बिहार की खबर पर मुहर लगी है। विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए में चल रही रस्साकशी पर फर्स्ट बिहार ने 2 दिन पहले ही यह बताया था कि जीतन राम मांझी विधान परिषद चुनाव में एक सीट चाहते हैं।

आज किशनगंज में आयोजित अपनी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए मांझी ने बड़ा विस्फोट किया है। जीतनराम मांझी ने खुले मंच से ऐलान किया है कि वह मौजूदा गठबंधन में घुटन महसूस कर रहे हैं। मांझी के कहने का सीधा मतलब यह हुआ कि वह एनडीए गठबंधन के साथ सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। मांझी ने दो टूक लहजे में कहा है कि मौजूदा गठबंधन में कई ऐसी बातें हो रही हैं जिसे लेकर घुटन महसूस हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि विधान परिषद चुनाव सामने हैं और हमें यह सोच समझ कर फैसला करना होगा कि हमारे किसके साथ रहने से क्या नफा और नुकसान होने वाला है। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री पद से अपने इस्तीफे के फैसले को भी गलत करार दिया है। मांझी ने कहा है कि जब उनका इस्तीफा हुआ था उसके चंद महीने बाद ही बिहार में विधानसभा के चुनाव थे ऐसे में वह मानते हैं कि यह फैसला गलत था उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि 2024 आने में अभी ज्यादा समय नहीं है। जिनके पास समय नहीं होता है वे गेस पेपर लेकर पास करते हैं। सिलेक्टेड क्यूस्चन लेकर पास करते हैं। हमलोगों को भी सिलेक्टेड क्यूस्चन चुनना चाहिए। हमलोग अभी गठबंधन में है गठबंधन में कही कही हमलोग घुटन भी महसूस करते हैं। कभी कभी ऐसा होता है कि हम चार विधायक है आपस में सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं। हमलोग आपस में सामंजस्य बैठाकर काम करे। हमलोगों ने ऐतिहासिक गलतियां की है। 19 फरवरी 2015 हमने इस्तीफा दिया था चुनाव नवम्बर 2015 में होना था उस समय हमें इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। हमारे साथ विश्वासघात हुआ है और विश्वासघात कोई दूसरा नही किया बल्कि हमारे लोगों ने ही किया है। इसे देखकर निराला जी की पंक्ति याद आती है बड़ी जलन है इस ज्वाला में जलना कोई खेल नहीं..इधर देखता रहूं करूणा से मानवता में मेल नहीं…विजय पराजय की मत पूछो..हाय हमें अपनों का भय है…

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