पिछले दिनों हुई स्टेट एनवायरमेंटल एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी ने शर्तों के साथ इसकी अनुशंसा भी कर दी है। आगे पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकार इस पर अपनी अंतिम मुहर लगाएगा। मुहर लगने के साथ ही बालू घाटों की नीलामी में कोई तकनीकी परेशानी नहीं बचेगी। बालू घाटों को पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद उनकी नीलामी में कोई परेशानी नहीं आएगी।

वहीं दूसरी तरफ से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल या अन्य अदालतों में पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन के मामलों का सामना करने की आशंका भी कम हो जाएगी। आपको बता दें कि बिहार में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत बालू घाटों की नीलामी हो रही है। अगली नीलामी के पहले सरकार के अधिकारी सारी कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर लेना चाहते हैं ताकि कहीं कोई परेशानी ना आए। राज्य के अंदर उन सभी 84 बालू घाटों के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जहां से बालू का खनन होता है।

पटना के रागनियाडीह, बहादुरगंज, जरखा, महाबलीपुर, रामपुर वाइना, महुआर, देवदाहा, मसाढ़ी, पाभेरा, सतपरसा, तिकुल, रूपापुर, आनंदपुर, रानीतालाब, खिरोधारपुर, रानीपुर, चकमिकी, आदमपुर, सिकंदरपुर, समनपुरा। अरवल के छपरा, सोहसा, चपरा, खैरा, मगलापुर, मसदपुर, सोनभद्र। गया के सादीपुर, तिनेरी पोचाकंड, बिहटो शारित, केंदुआ, परेवा, पारुहारा, रामचौरा, खेसारी, लारपुर, मारनपुर। बांका के लखनौरी, रनगांव, दामोहन, खचमचिया, गोविंदपुर, खुदबदी, सबलपुर, पेर, बरोधा. चौड़ा, सहोरा, मझली मथानी, गोधा बहियार, बघौनिया, सारम, गोदिया, पटवे भोरवा, मालदौन, मझायारा, जितवारपुर, बिशनपुर। पश्चिम चंपारण के बैरिया, बैजुआ अल्फा, बेलवा, बिनाकी खैरा, परसौनी, नारायणपुर, धनहा, मछहा चिनवलिया, डुमरी, बलुही खैरा, खैरा। वैशाली के हरौली, चंद्रालय, हटारो। औरंगाबाद के परैया। जहानाबाद के सुलतानपुर। बक्सर के मौजा खोरमपुर और लखीसराय के सूरजगढ़ा बालू घाट शामिल हैं।

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