बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है इसके बावजूद 24 घंटों के भीतर 8 लोगों की मौत हो गयी है। शराब से हुई मौत से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। गोपालगंज में 10 लोगों की मौत हो गयी है जबकि बेतिया में 8 लोगों की संदिग्ध मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई गंभीर मरीजों का इलाज अस्पताल में जारी है। वही कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गयी है। बिहार में शराब से लोगों की हुई मौत पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर लिखा है कि “मुज़फ़्फ़रपुर में 5 दिन पूर्व ज़हरीली शराब से 10 मरे, कल और आज गोपालगंज में 20 लोग मरे, बेतिया में आज 13 लोग मरे, अधिकांश शवों को पुलिस बिना पोस्ट्मॉर्टम जला रही है। इन मौतों के ज़िम्मेवार क्या शराबबंदी का बेसुरा ढोल पीटने वाले मुख्यमंत्री सह गृहमंत्री नीतीश कुमार नहीं है?”

तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर यह भी लिखा कि” उपचुनाव में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की शह पर उनके मंत्रियों और पुलिस प्रशासन ने स्वयं मतदाताओं के बीच शराब वितरण किया। किस बात की शराबबंदी? इन मौतों का ज़िम्मेवार कौन है? बिहार में 20 हज़ार करोड़ की अवैध तस्करी और समांतर ब्लैक इकॉनमी के सरग़ना सामने आकर इसका जवाब दें।”

वही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी बिहार की एनडीए सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि “बिहार की नीतीश-भाजपा सरकार ने महंगाई-बेरोजगारी से जनता का दिवाला निकालने एवं निवाला छिनने के साथ ही गत सप्ताह ज़हरीली शराब पिलाने से 50 से अधिक लोगों की जान ली है।
मुख्यमंत्री दो शब्द संवेदना के भी प्रकट नहीं करेंगे क्योंकि इससे उनके द्वारा संरक्षित शराब माफ़िया नाराज हो जाएगा।”



वही बिहार के बीजेपी मंत्री का अजीबोगरीब बयान सामने आया है। खान व भूतत्व मंत्री जनक राम ने इसे विपक्ष की साजिश करार दिया है। अपने गृह जिले में 8 लोगों की मौत के सवाल पर जनक राम ने कहा कि शराबबंदी कानून को विफल करने के लिए विपक्ष इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दे रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में लगातार विकास हो रहा है और हर तबके के लोगों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है।



जनक राम ने कहा कि विकास के खिलाफ कुछ लोगों द्वारा कुचक्र रचा जा रहा है और बिहार सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। मंत्री जनक राम ने कहा कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि जो कुचक्र रचने वाले लोग हैं, चाहे वह किसी स्तर का अधिकारी हो या फिर जनप्रतिनिधि उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा सके।



गौरतलब है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून अप्रैल 2016 से लागू है। इस कानून के बने 5 साल से ज्यादा गुजर गये है लेकिन इसके बावजूद अबतक 15 अलग-अलग घटनाओं में जहरीली शराब से 84 लोगों की मौत हो चुकी है। जिससे शराबबंदी कानून पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

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