गांधी सेतु के पूर्वी लेन पर परिचालन शुरू होने के साथ ही इसको लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। गांधी सेतु के लोकार्पण समारोह में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर तेजस्वी यादव को आमंत्रित नहीं किए जाने पर आरजेडी ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरजेडी ने कहा है कि इस योजना को पूरा कराने में तेजस्वी यादव की अहम भूमिका रही, बावजूद उन्हें नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नहीं बुलाकर सिर्फ सामान्य विधायक की श्रेणी मे रखा गया।

आरजेडी की तरफ से प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि इस योजना को कार्यान्वित कराने में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है बावजूद इसके उन्हें भी सामान्य विधायक की श्रेणी मे रखा गया। जबकि इस पुल का बड़ा भाग तेजस्वी यादव के निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर में पड़ता है। आरजेडी प्रवक्ता ने साल 2005 के बाद गांधी सेतु की बदहाली के लिए एनडीए की सरकार को जिम्मेवार ठहराया।

आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद जब तेजस्वी पथ निर्माण विभाग के मंत्री बने तो गांधी सेतु का पुनर्निर्माण उनकी प्राथमिकता सूची में थी। पथ निर्माण मंत्री रहते हुए तेजस्वी यादव ने इसको लेकर केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर गांधी सेतु के पुनर्निर्माण का अनुरोध किया था। तेजस्वी यादव के अनुरोध पर गांधी सेतु के पुनर्निर्माण के लिए केन्द्र सरकार ने 1742 करोड की योजना को स्वीकृति दी थी।

आरजेडी प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि लोकार्पण समारोह के विज्ञापन से भी तेजस्वी यादव का नाम हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि विज्ञापन में जब बिहार सरकार के मंत्रियों के नाम थे तो स्थानीय विधायक और नेता प्रतिपक्ष के रूप में तेजस्वी यादव का नाम भी रहना चाहिए था लेकिन उनका नाम गायब कर दिया गया जबकि मंच पर वैसे लोग भी मौजूद थे जिन्होंने कभी इसका विरोध किया था। बता दें कि हाजीपुर में मंगलवार को आयोजित लोकार्पण समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से गांधी सेतु के पूर्वी लेन का लोकार्पण किया।

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