गुरूवार की रात जब पटना में अंधेरा पसरा था तो नीतीश सरकार बेनकाब हो गयी. गुरूवार को पूरे दिन मंत्री जीवेश मिश्रा के साथ पटना के डीएम और एसएसपी के नाम पर बदसलूकी का मामला छाया था. शाम में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और डीजीपी ने कह दिया था कि कोई बदसलूकी हुई ही नहीं. लेकिन जब रात ढ़ला तो सरकार के चेहरे का पर्दा हटा. देर रात पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह और एसएसपी उपेंद्र शर्मा मंत्री आवास पहुंच गये. मकसद सिर्फ एक था-जीवेश मिश्रा अपनी बेईज्जती को भूल जायें और सरकार के वफादार कारिंदों को बेदाग बचा लिया जाये. फर्स्ट बिहार की टीम ने गुरूवार की रात ही अपने फेसबुक पेज पर लाइव जाकर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया.

दरअसल गुरूवार को जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू ही हुई थी तो मंत्री जीवेश मिश्रा ने सदन में सनसनी फैला दी थी. मंत्री ने सदन में कहा कि पटना के डीएम-एसएसपी के काफिले के गुजरने के लिए उनकी गाड़ी रोक दी गयी. मंत्री ने भरे सदन में विधानसभा अध्यक्ष से पूछा-लोकतंत्र में डीएम-एसएसपी बड़ा है या मंत्री. विधानसभा अध्यक्ष इसे स्पष्ट कर दें. इसके बाद सदन में भारी हंगामा खड़ा हो गया था. विधानसभा अध्यक्ष ने खुद इस मामले की जांच करने का एलान किया. शाम में बिहार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद औऱ डीजीपी एसके सिंघल को विधानसभा अध्यक्ष ने तलब किया. दोनों अधिकारी जब बाहर निकले तो मीडिया ने रोका. सरकार के आला अधिकारियो ने मंत्री के साथ बदसलूकी होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया.

रात में शुरू हुआ असली खेल

रात के लगभग साढ़े नौ बजे फर्स्ट बिहार की टीम को पता चला कि पटना के डीएम-एसएसपी मंत्री जीवेश मिश्रा के घऱ जाकर माफी मांगने वाले हैं. फर्स्ट बिहार की टीम सबसे पहले मौके पर पहुंची. रात के अंधेरे में पटना के डीएम और एसएसपी एक ही गाड़ी पर मंत्री आवास में प्रवेश कर गये. मुंह छिपाकर मंत्री आवास के अंदर जाने की कवायद में एसएसपी की गाडी पर लगे नेम प्लेट को ढंक दिया गया था ताकि किसी को ये भनक नहीं लगे कि सुशासन के बहादुर कारिंदे मंत्री के आवास में अपनी कारगुजारी को मैनेज करने गये हैं.

मंत्री आवास में दोनों अधिकारी लगभग एक घंटे तक जमे रहे. सूत्र बताते हैं कि इस दौरान पटना के डीएम और एसएसपी मंत्री जीवेश मिश्रा को मनाने की कोशिश करते रहे. वे ये बताते रहे कि भूलवश मंत्री की गाड़ी को रोक दिया गया था. ऐसा कोई इरादा नहीं था कि उनकी इज्जत उतारी जाये. लेकिन मंत्री मानने को तैयार नहीं थे. सूत्र बताते हैं कि मंत्री ने दोनों से कहा कि मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास है. विधानसभा अध्यक्ष खुद मामले की जांच कर रहे हैं. ऐसे में वे कुछ नहीं कर सकते.

गुहार लगा रहे थे डीएम-एसएसपी

मंत्री आवास में मौजूद एक कर्मचारी ने फर्स्ट बिहार को बताया कि पटना के डीएम और एसएसपी की हालत ये थी कि वे किसी सूरत में बात को मैनेज करने की कोशिश में लगे थे. लिहाजा वे मंत्री के सामने ऐसे गुहार लगा रहे थे जैसे दरोगा औऱ बीडीओ भी नहीं लगाता. दोनों अधिकारियों ने मंत्री से कहा कि वे अकेले में चलकर बात करें. मंत्री उनसे बात करने गये भी लेकिन वहां भी उनके जोर-जोर से बोलने की आवाज आ रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंत्री कह रहे थे कि वे पटना से बोरिया बिस्तर बांध कर अपने विधानसभा क्षेत्र लौट जाने को तैयार हैं लेकिन अपनी इज्जत के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे. एक घंटे तक मंत्री की मान-मनौव्वल के बाद दोनों अधिकारी वापस लौटे.

मंत्री ने कहा-तेवर बदलने का सवाल ही नहीं

पटना के डीएम औऱ एसएसपी के वापस लौटने के बाद फर्स्ट बिहार की टीम ने मंत्री जीवेश मिश्रा से बात की. मंत्री ने कहा कि पटना के डीएम औऱ एसएसपी सरकार के आदमी हैं और मंत्री सरकार होता है. सरकार का कोई सेवक मंत्री से मिलने आ ही सकता है. इसमें कोई गलत बात तो है नहीं. सवाल पूछा गया कि क्या उनके तेवर बदल गये हैं. मंत्री ने कहा कि उनका तेवर औऱ कलेवर कभी बदलने वाला नहीं है. हां, उनके साथ विधानसभा परिसर में जो कुछ हुआ वह अध्यक्ष खुद देख रहे हैं इसलिए उस मामले में वह कुछ नहीं बोलेंगे. जो कुछ होना है वह शुक्रवार की सुबह सामने आ जायेगा.

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