लोक आस्था के महापर्व छठ पर पूरा बिहार आस्था के रंग में सराबोर है। हर तरफ छठी मइया के गीत गुंजायमान हो रहे हैं। सड़कें और गलियां सज गई हैं। घाट चकाचक हो गए हैं। चार दिवसीय अनुष्ठान के दूसरे दिन मंगलवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी पर खरना सम्पन्न हुआ

छठ व्रतियों ने पूरे दिन उपवास पर रहकर मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी पर खरना का प्रसाद बनाया। शाम 5:45 से 6:25 बजे के बीच छठी मैया को प्रसाद के रूप में तैयार गुड़ से बनी खीर, रोटी और केला का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। 

मुंगेर, लखीसराय के सूर्यगढ़ा, भागलपुर के खरीक, औरंगाबाद के देव, बिहारशरीफ के बड़गांव, बाढ़ के पंडारक, पटना के उलार समेत प्रमुख सूर्य मंदिरों और नदी-तालाबों के किनारे बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ेगा। बुधवार की शाम कार्तिक शुक्ल षष्ठी को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। गुरुवार को चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महापर्व छठ संपन्न होगा।

आचार्य प्रियेन्दू प्रियदर्शी के अनुसार, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने का समय शाम में 4:30 से 5:26  बजे के बीच और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने का समय सुबह 6:34 बजे से है। शाम में अर्घ्य गंगा जल से दिया जाता है। जबकि उदयगामी सूर्य को अर्घ्य कच्चे दूध से देना चाहिए। आचार्य राजनाथ झा के अनुसार, भारतीय सनातन धर्म में सूर्य उपासना का विशेष पर्व छठ है। 

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