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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अपने अधिकारियों से काम में तेजी और पारर्शिता की उम्मीद तो रखता है, लेकिन उनको प्रोन्नति देकर उत्साहित नहीं करता है। विभाग की इस अनदेखी के कारण लगभग एक दर्जन को छोड़ दें तो 500 सौ से अधिक अंचल प्रभारी अंचलाधिकारियों के ही भरोसे हैं। हाल यह है कि राजस्व सेवा के गठन के बाद से आज तक एक भी अधिकारी डीसीएलआर पद तक नहीं पहुंचा। सभी 101 अनुमंडलों में इस पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही कार्यरत हैं।

2010 में बनी राजस्व सेवा नियमावली

राज्य सरकार ने 2010 में राजस्व सेवा नियमावली बनायी थी। इसमें मूल पद का नाम राजस्व अधिकारी कर दिया गया। इनके 886 पद हैं। इन पदों में एक चौथाई राजस्व कर्मचारी को प्रोन्नति से भी भरना है। इसके लिए उन्हें पीरक्षा देनी होती है, लेकिन 11 साल में मात्र एक बार परीक्षा हुई। उस परीक्षा में जो प्रोन्नत हुए राजस्व अधिकारी बने और दो साल में उन्हें प्रभारी सीओ बना दिया गया। लेकिन राजस्व सेवा में सीधे बहाल अधिकारियों की प्रोन्नति अब तक नहीं हुई। लिहाजा एक दर्जन को छोड़ दें तो सीओ पद प्रभार में ही चल रहा है।

कई अधिकारी डीसीएलआर के पद के हकदार हो गये हैं

नियमावली के अनुसार मूल पद पर बहाल अधिकारियों को पांच प्रोन्नति के बाद अपर समाहर्ता के पद पर पहुंचना है। राजस्व अधिकारी में बहाल व्यक्ति को पहली प्रोन्नति के बाद अंचलाधिकारी पद पर तैनात करना है। लेकिन अब तक एक भी प्रोन्नति नहीं दी गई है। कई अधिकारी डीसीएलआर के पद के हकदार हो गये हैं। लेकिन, प्रोन्नति नहीं मिलने के कारण अब भी वह राजस्व अधिकारी के पद पर ही तैनात हैं। डीसीएलआर के सभी पदों पर बिहार प्रशानिक सेवा के अधिकारी ही हैं।

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