सीतामढ़ी समेत पूरे बिहार में आज से मध्यान भोजन शुरू होनी है। ऐसे में सीतामढ़ी के 90% विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए चावल उपलब्ध नहीं है। जिससे यह साबित होता है कि विभाग के द्वारा जारी फरमान हवा हवाई था। मिली जानकारी के अनुसार संबंधित स्कूल के एचएम के द्वारा मध्यान भोजन को लेकर सारी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन ऐन वक्त पर स्कूलों में चावल नहीं पहुंचा। जिससे आज स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिली। स्कूलों में शिक्षक और रसोईया चूल्हा और हरी साग सब्जी समेत अन्य सामान लेकर बैठे रह गए।

1:00 बजे तक स्कूलों में चावल नहीं मिलने के बाद सभी निराश हो गए। एमडीएम चालू होने से जहां स्कूली बच्चों में खुशी थी वहीं स्कूलों में आज छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है। लेकिन मध्यान भोजन नहीं मिलने के बाद छात्र एवं छात्राएं के भी चेहरे पर मायूसी देखी गई। हालांकि कुछ विद्यालयों में मध्यान भोजन को लेकर स्थानीय एचएम के द्वारा विरोध भी किया गया है। लेकिन 70% विद्यालयों में चावल उपलब्ध नहीं है। गिने-चुने विद्यालयों में पहले का बचा हुआ चावल था जिससे मध्यान भोजन चालू हुआ।



मिड डे मील के डीपीओ मुकेश कुमार ने बताया कि थोड़ी प्रॉब्लम आ रही है। मैं अभी पटना में हूं मध निषेध सिपाही परीक्षा का कॉपी जमा करने आया हूं। वैसे अन्य कर्मियों को इस कार्य में लगाया गया है संभवत दो-तीन दिन में सब कुछ ठीक हो जाएगा। संवेदक का टर्म पूरा होने के वजह से यह परेशानी आई है। इस बात से सीतामढ़ी डीएम को भी अवगत कराया जा चुका है। हल्की वैसे स्कूलों को चयनित कर वहां सामग्री भेजी जा रही है।



बता दें कि 2 वर्ष से अधिक समय के बाद जिला के स्कूलों में आज से मिड डे मील चालू होना था। करीब दो वर्ष के अंतराल पर पिछले सात फरवरी से कक्षा एक से उपर कि सभी स्कूल खोल दिए गए थे। लेकिन किसी स्कूल में मिड डे मील चालू नहीं की गई थी। लेकिन डीपीओ के द्वारा सोमवार से सभी स्कूलों में मिड डे मील चालू करने का निर्देश देते हुए प्रधानाध्यापकों को पत्र भेज दिया गया था। इसके लिए सभी एचएम को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किया गया था।

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