राज्य के विभिन्न सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के कुल 5,504 छात्रों को कैंपस सेलेक्शन के जरिए अलग-अलग कंपनियों ने नौकरी की पेशकश की है। पिछले वर्ष की तुलना में कैंपस प्लेसमेंट में चार गुना से अधिक की वृद्धि देखी गई है। जिन लोगों को नौकरी के प्रस्ताव मिले हैं, उनमें 1950 इंजीनियरिंग के छात्र हैं और बाकी 3,554 विभिन्न सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों से हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जो इस साल पास आउट हुए हैं या अपने अंतिम वर्ष में हैं। इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के कुल 1,240 छात्रों को पिछले साल कैंपस सेलेक्शन के जरिए रखा गया था, जिसमें इंजीनियरिंग कॉलेजों से 419 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों से 821 शामिल थे।

30 लाख तक का मिला पैकेज
2018-19 में कुल 149 इंजीनियरिंग छात्रों और 308 पॉलिटेक्निक छात्रों को कैंपस सेलेक्शन के जरिए नौकरी मिली, जबकि 2019-20 में इंजीनियरिंग कॉलेजों के 428 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के 513 छात्रों को नौकरी मिली थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री सुमित कुमार सिंह ने सभी छात्रों को बधाई दी और कॉलेजों के साथ-साथ विभागों में प्लेसमेंट सेल को छात्रों को नौकरी दिलाने में हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि एक इंजीनियरिंग स्नातक को अधिकतम 30 लाख रुपये के पैकेज की पेशकश की गई थी। BYJU’S से कुल मिलाकर 96 छात्रों को 10 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज मिला। हालांकि, इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए औसत वार्षिक पैकेज 3.5 लाख रुपये प्रति वर्ष था।

बिहार के इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक छात्रों की बल्ले-बल्ले
एक पॉलिटेक्निक छात्र के लिए उच्चतम पैकेज 4.8 लाख रुपये प्रति वर्ष था। उनका औसत पैकेज 2.4 लाख रुपये सालाना था। लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि कैंपस चयन के तीन तरीके हैं- विभाग स्तर पर पूल कैंपस प्लेसमेंट, किसी विशेष कॉलेज के लिए कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव और नियोक्ता संगठन द्वारा आयोजित ऑफ-कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव। लोकेश सिंह की ओर से साझा की गई सूची के अनुसार, शीर्ष पांच कंपनियां जहां अधिकतम इंजीनियरिंग स्नातकों को रखा गया है, उनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज (459), विप्रो (174), टीसीएस (111), बायजू (96) और इंफोसिस (87) शामिल हैं। कॉलेज के आंकड़ों से पता चलता है कि भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के अधिकतम 182 छात्रों को कैंपस सेलेक्शन के जरिए नौकरी मिल रही है।

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