शनिदेव को न्याय देवता व कर्मफलदाता कहा जाता है। शनिदेव जातक को उसके अच्छे व बुरे कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनिदेव का नाम सुनते ही लोग घबराते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव के प्रकोप से भगवान शिव भी बच नहीं पाए थे। शनि की साढ़ेसाती व शनि ढैय्या दशा को बेहद कष्टकारी माना गया है। कहते हैं कि जिन जातकों की कुंडली में शनिदेव की स्थिति शुभ नहीं होती है, उन्हें कष्टों का सामना करना पड़ता है। शनिदेव जब अशुभ फल प्रदान करने लगें तो व्यक्ति को शनिवार को पूजा करने की सलाह दी जाती है। इस बार 14 मई 2022, को पड़ने वाले शनिवार को विशेष संयोग बन रहा है। जानिए किन राशियों के लोग करें शनिदेव की पूजा-

14 मई 2022, शनिवार को शनिदेव की पूजा

हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 मई 2022 को वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी है। इस दिन शनिवार है और चित्रा नक्षत्र है। शनिवार को सुबह 06 बजकर 13 मिनट तक चंद्रमा कन्या राशि में इसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 मई, शनिवार को सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार, सिद्धि योग में किए गए कार्यों में व्यक्ति को सफलता हासिल होती है। इस योग को बेहद लाभकारी माना गया है। यह योग व्यक्ति की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है। शनिवार के दिन इस योग के बनने से शनिदेव की पूजा का महत्व बढ़ रहा है।

कर्क राशि- शनि राशि परिवर्तन के साथ ही 29 अप्रैल 2022 से कर्क राशि वालों पर शनि ढैय्या शुरू हो चुकी है। कर्क राशि वालों को इस दौरान दांपत्य जीवन, सेहत व धन के मामले में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान धन अधिक खर्च होगा। यह समय आपके लिए चुनौतियों भरा हो सकता है।

29 अप्रैल से इस राशि के जातक शनि ढैय्या से पीड़ित हैं। वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगल हैं। शनि की ढैय्या के दौरान आपके गुस्से में वृद्धि हो सकती है। गलत फैसले ले सकते हैं। कोई योजना असफल हो सकती है। धन के मामले में विशेष सावधानी बरने की जरूरत है। जीवनसाथी का ध्यान रखें। विवाद से बचें। शनिवार को शनिदेव की पूजा करने से आपको शनि ढैय्या से राहत मिल सकती है।

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