शहर के चौक-चौराहों पर लगाये गये सार्वजनिक चापाकलों की स्थिति काफी खराब है. कहीं चापाकल सूखा पड़ा है तो कहीं टूटा होने के कारण लोगों के के इस्तेमाल में नहीं आ पा रहा. सही तरीके से रखरखाव नहीं होने के कारण चापाकल होने के बावजूद लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही.

इससे स्थानीय व्यवसायी सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. चिलचिलाती धूप में पीने योग्य पानी नहीं मिलने से लोग दर-दर भटकने को मजबूर है. प्रभात खबर की टीम ने सोमवार को पड़ताल की, जिसमें पेयजल का यह संकट सामने आया. हालांकि नगर निगम और पीएचडी द्वारा जगह जगह लगाया गया नल का जल उपलब्ध है, लेकिन इससे पानी निकलने का समय फिक्स है. सुबह और शाम दो-दो घंटे. लेकिन, चिल्लाती धूप में पीने का पानी कहां से लाएं? यह एक बड़ा सवाल है.पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा।



सुभाष चंद्र बोस चौक पर लगे चापाकल पिछले चार वर्षों से खराब पड़ा है. स्थानीय व्यवसायी अनिल सिंह, राधे कुमार, मनोज कुमार आदि ने बताया कि पहले आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा कर चापाकल का रख-रखाव किया जाता था. लेकिन पिछले चार वर्षों से चापीकल खराब पड़ा है. नल का जल के तहत लगाए गए नल से सुबह-शाम दो-दो घंटे पानी आता है. शंकर मंदिर के समीप एक चापाकल है, उससे ही पीने का पानी लाने को मजबूर है. उन्होंने खराब पड़े चापाकल को ठीक कराने की बात कही

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