मुंबई से अहमदाबाद (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train) के बीच बन रहा देश का पहला हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम तेज गति से चलने लगा है. देश में जापान (Japan) के सहयोग से इस पहली बुलेट ट्रेन परियोजना (Bullet Train Project) का काम चल रहा है, लिहाजा इस प्रोजेक्ट को लेकर जापान की भी निगाहें लगी हुई हैं. यही वजह है कि जापान के राजदूत सतोशी सुजुकी भी डेलिगेशन के साथ गुजरात (Gujarat) पहुंचे और कंस्ट्रक्शन साइट का जायजा लिया. सूरत से लेकर नवसारी और दमंनदीव तक जायजा लिया.

कब तक चलेगी पहली बुलेट ट्रेन?
अधिकारियों के मुताबिक 2026 में मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का ट्रायल शुरू हो जाएगा. इसके बाद 2027 की शुरुआत में देश की पहली बुलेट ट्रेन चलने लगेगी. सूरत से बिलिमोरा के बीच लगभग 50 किलोमीटर के हिस्से में यह ट्रायल शुरू होगा. गुजरात में 99 फीसदी भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है और तेज गति से निर्माण कार्य चल रहा है. जापानी राजदूत सतोशी सुज़ुकी ने कहा कि भारत ने चाहे तो दूसरे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में भी जापान साथ देने को तैयार है.

मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहा देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का ड्रीम प्रोजेक्ट है. पहले इसको पूरा करने का टारगेट 2023 रखा गया था और शुरुआत में तो रेलवे ने ये भी दावा किया था कि एक साल पहले 2022 में इसको पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन गुजरात और महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण में देरी ने इस प्रोजेक्ट को लटका दिया. बाकी रही सही कसर कोविड ने भी पूरी कर दी. अब कहीं जाकर फिर से NHSRCL ने इसके काम की रफ्तार को गति दी है.

क्या है प्रोजेक्ट की खासियत?
इस प्रोजेक्ट में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर (Mumbai Ahmedabad Corridor) की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है. इस पर बुलेट ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी. 2 घंटे 7 मिनट में मुंबई से अहमदाबाद का सफर पूरा हो जाएगा. इस कॉरिडोर पर कुल 12 रेलवे स्टेशन होंगे जिनमें गुजरात में 8 और महाराष्ट्र के हिस्से में चार रेलवे स्टेशन आएंगे.

जापान के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को तैयार किया जा रहा है. जापान के बैंक ने 0.1 परसेंट ब्याज पर इस प्रोजेक्ट के लिए कर्ज दिया हुआ है. प्रोजेक्ट में देरी के चलते कंस्ट्रक्शन लागत कई गुना बढ़ चुकी है. हालांकि भारत और जापान दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि आपस में बातचीत से इसका भी समाधान निकाल लिया जाएगा.

क्यों पूरा नहीं हुआ तय टारगेट?
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी की एक बड़ी वजह जमीन अधिग्रहण में भारी भरकम मुकदमेबाजी रही. गुजरात में जमीन अधिग्रहण को लेकर इतने ज्यादा मुकदमे हुए कि रेलवे के लिए जमीन हासिल करना कई साल तक मुश्किल भरा रहा. दूसरी बड़ी वजह रही महाराष्ट्र में स्थानीय राजनीत. BJP और शिवसेना के बीच बिगड़े राजनीतिक समीकरण का असर इस प्रोजेक्ट पर भी पड़ा. सूत्रों की माने तो शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार के असहयोग के चलते मुंबई में प्रोजेक्ट के लिए जमीन हासिल करना चुनौती रहा. हालत ये रही कि बुलेट ट्रेन के मुंबई कुर्ला टर्मिनल का टेंडर 11 बार रेलवे के NHSRCL को रद्द करना पड़ा. अभी भी महाराष्ट्र में 68 फीसदी जमीन ही इस प्रोजेक्ट को मिली है.

तमाम दिक्कतों के बावजूद इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री ने रिटायर्ड रेलवे अधिकारी सतीश अग्निहोत्री को इसका CMD बनाया तब जाकर काम तेज गति से होना शुरू हुआ. NHSRCL के CMD सतीश अग्निहोत्री ने Zee news को बताया कि ये प्रोजेक्ट कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव हर दिन काम काज का लेखाजोखा लेते हैं और रिपोर्ट प्रधानमंत्री को जाती है. केंद्र सरकार की कोशिश ये है कि भले ही इस प्रोजेक्ट में देरी हुई हो लेकिन देश का पहली बुलेट ट्रेन का सपना हर हाल में पूरा होना चाहिए.

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक अब तक इस प्रोजेक्ट में गुजरात के भीतर काफी काम पूरा हो चुका है. गुजरात में अहमदाबाद का साबरमती रेलवे स्टेशन लगभग बनकर तैयार है. दूसरे रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है. बिलिमोरा, बड़ोदरा, आनंद, वापी ,सूरत, भरूच के रेलवे स्टेशन का काम भी तेजी से किया जा रहा है. इस कॉरिडोर के बीच में आने वाली नर्मदा, ताप्ती, माही और साबरमती जैसी नदियों पर पुल का निर्माण कार्य भी जोर-शोर से चल रहा है.

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