सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आर्टिकल 370 भले ही रहे या ना रहे, लेकिन जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और हमेशा रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर विधान सभा सीटों के परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की. ये याचिका श्रीनगर निवासी हाजी अब्दुल गनी खान और डॉक्टर अयूब की ओर से दायर की गई थी.

‘कश्मीर हमेशा अभिन्न हिस्सा था’
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 को बेअसर करने के खिलाफ दायर याचिकाओं का मसला भी उठाया. इस पर जस्टिस एम एम सुंदरेश ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील से पूछा कि क्या वो इस याचिका में आर्टिकल 370 को हटाए जाने को भी चुनौती रहे हैं.

इस पर वकील ने जवाब दिया- नहीं, हमने इस याचिका में उसे चुनौती नहीं दी है. लेकिन 5 अगस्त 2020 के बाद कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया. इस पर जस्टिस संजय किशन कौल ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ये बात सही नहीं है. अपने शब्दों को सावधानी से चुनिए. कश्मीर हमेशा भारत का हिस्सा था, सिर्फ एक स्पेशल प्रोविजन (आर्टिकल 370) को हटाया गया है.

परिसीमन पर केंद्र, जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि सुनवाई सिर्फ परिसीमन पर होगी. इसमें अनुच्छेद 370 पर विचार नहीं किया जाएगा, क्योंकि अनुच्छेद 370 का मामला पहले से ही कोर्ट के सामने लंबित है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विधान सभा सीटों के परिसीमन को चुनौती दिए जाने के मसले पर केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया. कोर्ट ने देरी से याचिका दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ताओं की खिंचाई भी की.

कोर्ट ने नहीं लगाई रोक
कोर्ट ने कहा कि 2020 के नोटिफिकेशन को दो साल बाद आप चुनौती दे रहे हैं. क्या आप अभी तक सो रहे थे! कोर्ट ने साफ कर दिया कि फिलहाल परिसीमन प्रकिया पर हम रोक नहीं लगा रहे हैं. केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन का जवाब आने दीजिए. अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी

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