महात्मा गांधी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं…यह बात बोलते तो कई लोग हैं। मगर इसे जीवन में उतारने का काम सूरत के एक अध्यापक ने किया है। उन्होंने विद्यार्थियों में करुणा, दया, प्रेम और देशप्रेम के अहसास को जगाने के लिए गांधीवाद का सहारा लिया है। पिछले 18 वर्ष से महेश पटेल ने करीब 7000 बच्चों को गांधीवादी तरीके से करुणा का पाठ सिखाया है। वे सूरत में 1992 से स्कूलों का संचालन कर रहे हैं।

वे खुद तो बहुत पहले ही महात्मा गांधी की सीखों के आधार पर जीवन बिताते हैं, मगर 2003 में उन्होंने गांधीवाद को स्कूलों में अपनाने का निश्चय किया। उनका कहना है कि बच्चों को शिक्षा जिस प्रकार दी जाए उसी प्रकार उनका विकास होता है। अगर उन्हें करुणा और दया सिखाई जाए तो आने वाले में अच्छे इंसान बन सकेंगे। अगर विद्यार्थी कोई भी गलती बार-बार कर रहा है तो इसका सीधा मतलब यह होता है कि शिक्षक अपनी शिक्षा उस तक नहीं पहुंचा पाया है।

पटेल ने वर्ष 2016 में लगातार 51 घंटे चरखा चलाया था। वजह यह थी कि उनके स्कूल में बच्चे साफ-सफाई रखने की बात नहीं मान रहे थे। उन्होंने खुद भी से बच्चों से बात की, मगर जब कोई रास्ता नहीं निकला तो पटेल ने कहा मैं सजा के तौर पर 51 घंटे तक चरखा चलाऊंगा। बच्चों ने अगले दिन ही माफी मांग ली और शिक्षकों द्वारा दिए गए निर्देश का पालन करने का वादा किया। लेकिन, पटेल ने बच्चों से कहा अगर आप कोई गलती करते हैं, तो उसका गुनहगार मैं हूं, आप – अपनी गलती मान गए लेकिन, मेरी सजा पूरी होगी।

पटेल बताते हैं, बच्चों को मारपीट कर आप और विद्रोही बना सकते हो। जब तक उनके हृदय में आदर नहीं होगा, उनके चरित्र और व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा। मार से वे आपके शत्रु बनेंगे। डर से उनका विकास कम होगा। जब वे खुद चीजों को समझने लगेंगे तो उनका विकास तेज होगा। हमने कुछ जगहों पर नीम के पत्तों से जूस निकालने की मशीन लगाई है। अगर सजा देना अनिवार्य हो जाए तो हम उन्हें नीम का को जूस पीने की सजा देते हैं। जिससे उन्हें कुछ

समय तक ही कड़वाहट सहना पड़े और नीम शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है। पटेल बचपन से ही गांधी जी के रास्तों पर चल कर अपना सभी कार्य स्वयं करते थे। वे अपने विद्यार्थियों को भी यही शिक्षा दे रहे हैं।

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