उत्तर भारत और पूर्वांचल में मनाए जाने वाले छठ पर्व की समाप्ति के बाद अब त्यौहारों का मौसम खत्म हो गया है. त्यौहारों का मौसम खत्म होने के बाद अब लोगों को कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका एक बार फिर सताने लगी है.

दरअसल, त्यौहारों के दौरान कोरोना की गाइडलाइन जिस तरह फेल साबित हुई, उसके बाद यह आशंका और बढ़ गई है कि देश में तीसरी लहर की एंट्री हो सकती है. उत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले 1 हफ्ते के दौरान संक्रमण के मामले भी बढ़े हैं. दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा और यूपी में नए मामले सामने आए हैं.

भारत में एक तरफ जहां लोग भी तीसरी लहर की आशंका से डरे हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ से यूरोप में कोरोना कहर बरपा रहा है. कोरोना के मामले यूरोप के ज्यादातर देशों में सामने आ रहे हैं. रूस के बाद जर्मनी जैसे देश में कोविड-19 सबसे ज्यादा नए मामले सामने आए हैं.

न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, जर्मनी में पिछले 24 घंटे के दौरान 50 हजार नए केस सामने आए हैं. जर्मनी में हालात ऐसे हैं कि पिछले 5 महीनों का रिकॉर्ड टूट गया है. ब्रिटेन में भी 30 हजार से अधिक केस सामने आ रहे हैं. पिछले एक हफ्ते में ब्रिटेन में 12 सौ से ज्यादा लोगों की मौत कोरोनावायरस चुकी है. जबकि जर्मनी में यह आंकड़ा लगभग 950 के आसपास है.



ऐसा नहीं है कि कोरोना की चपेट में केवल जर्मनी और ब्रिटेन जैसे ही बड़े देश ही हैं. नीदरलैंड, पोलैंड और रूस में भी कोरोना कहर बरपा रहा है. यह हालत तब है जब इन देशों में दो तिहाई आबादी को कोरोना वैक्सीन दी जा चुकी है. कोरोना वैक्सीनेशन होने के बावजूद महामारी का फैलना इस बात को साबित करता है कि वैक्सीन कोई ऐसा हथियार नहीं जिससे कोरोना का मुकाबला किया जा सके.



कोरोना से बचाव के लिए अभी भी गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है. सामाजिक दूरी और मास्क का इस्तेमाल जीवन का हिस्सा अगर नहीं रहा तो महामारी आप को चपेट में ले सकती है.

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