supreme court

दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से बिगड़ते हालात के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं. चीफ जस्टिस NV रमन्ना ने केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि वायु प्रदूषण एक गंभीर स्थिति है. हमें घर पर भी मास्क पहनने पड़ सकते हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार को वायु प्रदूषण से निपटने का उपाय निकालने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर मामला है. अगले 2 से 3 दिनों में हालात और खराब हो जाएंगे. अभी तत्काल इसका हल निकालें. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि आपको इस मुद्दे को राजनीति और सरकार से परे होकर देखना होगा. कुछ ऐसा समाधान निकलना होगा जिससे 2 से 3 दिनों में बेहतर महसूस किया जा सके.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यकीन दिलाया कि वे पराली का जलना रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं. सरकार ने कहा कि पिछले पांच-छह दिनों में हमने जाे प्रदूषण देखा है वह पंजाब में पराली जलने की वजह से है. राज्य सरकारों को अपने काम में तेजी लाने की जरूरत है. पराली खेतों में अब भी जलाई जा रही है. इसपर चीफ जस्टिस रमना ने सरकार से पूछा- आप क्यों ऐसा जताना चाहते हैं कि सिर्फ पराली जलाने से ही प्रदूषण हो रहा है. उससे सिर्फ कुछ प्रतिशत ही प्रदूषण फैल रहा है, बाकी का क्या?

सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम ऐसा नहीं कह रहे हैं, कि सिर्फ किसान ही इस प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं. हमने ऐसा कभी नहीं कहा. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर किसानों को इंसेंटिव नहीं मिला, तो बदलाव आने की गुंजाइश कम है. किसी चीज पर ऐसे ही अमल नहीं किया जा सकता. तुषार मेहता ने कहा कि हम धूल को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं. इसमें राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है. यह एक मिली-जुली जिम्मेदारी है. मैं चाहूंगा कि राज्य सरकारें भी सोमवार को इस मामले में एफिडेविट फाइल करें.

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