देशभर में जारी अघोषित बिजली संकट का असर सीतामढ़ी जिले में भी देखने को मिल रहा है। जिले में मांग की अपेक्षा कम विद्युत आपूर्ति हो रही है। बीते दिनों सीतामढ़ी में पावर ग्रिड का उद्घाटन करने आए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने इसको लेकर चिंता भी व्यक्त की थी।

कार्यपालिक अभियंता कुंदन कुमार ने बताया कि जिले में पहले 144 मेगावाट विधुत की आपूर्ति होती थी. अब 85 मेगावाट विद्युत आपूर्ति हो रही है. कुछ दिनों से कम विद्युत आपूर्ति के कारण पूरे जिले में सभी फीडरों को रोटेशन पर चलाया जा रहा है.

कंपनी अधिकारियों के अनुसार एनटीपीसी की बाढ़ व कहलगांव की एक यूनिट बंद हो गई। इस कारण राज्य को केंद्रीय कोटे से लगभग 700 मेगावाट कम बिजली मिली। केंद्रीय सेक्टर से बिहार को 5213 मेगावाट बिजली मिलनी है पर 4513 मेगावाट ही बिजली मिल सकी।

केंद्रीय कोटे से कम बिजली मिलने के कारण कंपनी ने खुले बाजार से 2000 मेगावाट बिजली लेने के लिए बोली लगाई। लेकिन, बाजार में बिजली उपलब्ध नहीं होने के कारण बिहार को मात्र नौ मेगावाट ही बिजली मिल सकी। इस कारण स्थिति यह हो गई कि आम तौर पर दिन में ही 5000 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी रात में भी इतनी बिजली नहीं दे सकी।

बुधवार को पीक आवर में पूरे बिहार को बमुश्किल 4900 मेगावाट बिजली मिल सकी। जबकि औसतन राज्य में अभी 6200 मेगावाट से अधिक बिजली आपूर्ति की जाती है। लू के साथ भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती से लोगों का बुरा हाल रहा।

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