सीतामढ़ी व पूर्वी चंपारण जिले सहित नेपाल को सड़क सम्पर्क से जोड़नेवाले लालबकेया नदी के फुलवरिया घाट पर आठ वर्षों में भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। इससे दोनों जिला सहित नेपाल में आने जाने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इसी बीच स्थानीय लोगों द्वारा चचरी व नाव के सहारे नदी पार कराते हैं और लोगों से इसके बदले रुपये लिए जाते है। नाव वाले सभी यात्रियों से अवैध रूप से रुपये लेते है। नाव पर साईकल या मोटरसाइकिल जान जोखिम में डालकर ले जाया जाता है।

आपको बता दें कि वर्ष 2004 में आयी बाढ़ में उक्त घाट पर बना लोहे का पुल बह गया था। तबसे आज तक इस घाट पर पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। बरसात में तीन चार महीनों तक इस घाट से सड़क सम्पर्क भंग रहता है। लोगों को नदी पार करने के लिए कई महीनों तक नाव का सहारा लेना पड़ता है।

इस घाट पर वर्ष 2007 में नाव दुर्घटना हुयी थी, जिसमें 12 लोगों की जानें चली गयी थी। पुल निर्माण के लिए तत्कालीन सांसद रमा देवी द्वारा वर्ष 2012 में भूमि पूजन किया गया था। उसके बाद पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ। लेकिन निर्माण कार्य में लगातार पेंच फंसता चला गया और निर्माण कार्य अधूरा रह गया।

पुल का पांच खंभा बनकर तैयार है। लेकिन एक खंभे को दूसरे खंभे से जोड़नेवाले उपरी हिस्सा का कार्य अबतक नहीं हो पाया है। नदी पार करने के लिए बार बार डायवर्सन का निर्माण किया जाता है लेकिन जैसे ही नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है डायवर्सन बह जाता है तथा आवागमन ठप पड़ जाता है।

Input : Chandan Pathak (Bairgania)

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