सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा थाना क्षेत्र से बच्चों को बहला-फुसलाकर पंजाब में बाल मजदूरी कराने का मामला सामने आया है। नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त श्री कैलाश सत्यार्थी की संस्था ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के सहयोग से 13 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से छुड़ाया गया।

जानकारी के मुताबिक दो साल पहले सोनबरसा थाना क्षेत्र के एक गांव से गरीब परिवारों के दो बच्चों को पास के ही गांव के ठेकेदार बिगन राय ने पैसों का लालच देकर पंजाब में आलू के खेतों में काम करवाने के लिए ले गया। कई दिनों तक माता-पिता का बच्चों से संपर्क नहीं हुआ।

अपने बच्चे को खोजते हुए जब एक पिता पिछले साल पंजाब पहुंचे तो अपने बच्चों को बुरे हालात में देखकर दंग रह गए। उन्होंने देखा कि बच्चों के साथ और भी कई सारे बच्चों को दिन में 18- 18 घंटा काम करवाया जाता है। एक वक्त का खाना दिया जाता है तथा मजदूरी भी नहीं दिया जाता।

इन सब के बाद जब वह अपने बच्चे को घर ले जाने लगे तो ठेकेदार ने बच्चे के पिता को गाली-गलौज देते हुए तथा बच्चों को मार डालने की धमकी देते हुए वापस भेज दिया। इसके बाद ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ से संपर्क किया तथा बच्चों को छुड़वाने के लिए मदद मांगा।

इस घटना को ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के राज्य समन्वयक अरिजीत अधिकारी ने जिले के पुलिस अध्यक्ष तथा राज्य के वरीय पुलिस अधिकारियों से संपर्क बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन किया। इस घटना के संदर्भ में सोनबरसा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पंजाब पुलिस के सहयोग से जालंधर में स्थित आलू के खेतों से 13 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया। इनमें 11 बच्चे सीतामढ़ी, 1 बच्चा मुजफ्फरपुर तथा 1 बच्चा नेपाल का है। सभी बच्चों के उम्र 10 से 16 साल के बीच है। इस घटना में अभी तक प्राथमिकी में दर्ज दो बच्चों का रेस्क्यू नहीं किया जा सका है। माना जा रहा है इन बच्चों को पुलिस के आने से पहले ही छिपा दिया गया है।

जानकारों का मानना है कि इस घटना में पुलिस को और तत्परता तथा संवेदनशील तरीके से काम करना चाहिए। 2 हफ्ते बीत जाने के बाद भी ठेकेदार का नाम, पता और फोन नंबर रहते हुए भी उनके लोकेशन को ट्रैक नहीं किया गया तथा एक ही पुलिस अधिकारी को बच्चों को रेस्क्यू करने के लिए पंजाब भेजा गया जबकि राज्य पुलिस के वरीय अधिकारियों का आदेश था कि इस केस में सीतामढ़ी पुलिस को टीम गठन कर पंजाब से बच्चों को मुक्त करना है।

गौरतलब है कि प्राथमिकी दर्ज करने वाले परिवार को अपने दोनों बच्चों के जान मान की चिंता सता रही है। संस्था के अधिकारी अजीत अधिकारी का मानना है कि बिहार के सैकड़ों बच्चे को बधुआ मजदूर बना कर बाहर काम करने के लिए ले जाया जाता है। इस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।

वहीं, बचपन बचाओ आंदोलन के सहायक परियोजना अधिकारी मुकुंद कुमार चौधरी ने कहना है कि अन्य राज्यों से बालश्रम से मुक्त होने पर जिला में बच्चों का पुनर्वास सही से नहीं होने के कारण फिर से वह बाल मजदूरी के चंगुल में फसते जा रहे हैं।

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