बुधवार को श्रम अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर शहर अंतर्गत विशेष धावा दल के द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान चलाया गया. धावा दल ने जानकी स्थान से गौशाला होते हुए पुनौरा धाम तक सभी प्रतिष्ठानों में सघन जांच की.

सभी नियोजकों को बाल श्रमिकों से काम नहीं कराने का सख्त निर्देश दिया गया. श्रम कार्ड या स्टिकर लगाने की हिदायत दी गई, ताकि पता चल सके कि उनकी दुकान / प्रतिष्ठान एवं परिसर बाल श्रमिक मुक्त है. जांच के क्रम में जानकी वैष्णो मिठाई, पुनौरा से दो बाल श्रमिक व मनोज वैष्णव होटल, गौशाला चौक से एक बाल श्रमिक समेत कुल तीन बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया.

श्रम अधीक्षक ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत सभी नियोजकों के विरूद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज కే करने की कार्रवाई की जा रही है. जबकि, सभी विमुक्त बाल श्रमिकों को जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थापित कर उन्हें बाल गृह में रखा गया है. श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने बताया कि बच्चों से प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन के अंतर्गत गैर कानूनी है. बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अतर्गत बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और दो वर्षों तक का कारावास का प्रावधान है.

इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में सभी नियोजकों से 20,000/- प्रति बाल श्रमिक की दर से राशि की वसूली की जाएगी. विशेष धावा दल की टीम में सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सदर चंद्रनाथ राम, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मेजरगंज प्रदीप कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, सोनबरसा आदित्य कुमार चौधरी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बथनाहा सुशांत कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, रीगा रौशन कुमार सिंह, प्रथम संस्था, चाइल्डलाइन के प्रतिनिधि व पुनौरा थाना 5 की टीम शामिल थी.

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