दुल्हन की शादी से इन्‍कार की घटना तो आपने बहुत सुनी होगी मगर, पूरे तामझाम व रस्मो-रिवाज के बीच शादी के साथ अलगाव का ये मामला बिल्कुल हैरतअंगेज है।

जिसे सुनकर आप भी बोल उठेंगे- मिलन के साथ विदाई का ऐसा अफसाना जावेद अख्तर, सलीम खान और गुलजार साहब की कलम भी न लिख पाई होगी। जी, हां ये मामला चोरौत थाना क्षेत्र का है।

इस इलाके के एक लड़के की शादी सुरसंड थाना क्षेत्र में 13 मई को हुई। 14 मई को बरात बिना दुल्हन के लौटी तो गांव-जवार में सनसनी फैल गई। चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पता चला विदाई का समय आया तो दुल्हन ने दुल्हे के साथ जाने से इनकार कर दिया।

आखिर ऐसा क्या हुआ जो सारे रस्मो-रिवाज पूरे होने के बाद विदाई की बेला में दुल्हन ने ससुराल जाने से मना कर दिया। सवाल इसलिए भी अबूझ पहली बन गया है क्योंकि, ये शादी लड़का व लड़की की रजामंदी से हुई। बावजूद दूल्हा बिना दुल्हन के ही बरातियों संग घर लौट आया।

दूल्हा व बाराती विवाह स्थल पर पहुंचे तो दरवाजे पर कन्या पक्ष के लोगों ने बरात का जमकर स्वागत किया। दुल्हन के पिता व पंडित और उनके रिश्तेदार ने मिलकर द्वार पूजा कराई। गणेश पूजा के बाद कन्या के घर में अन्य रस्में हुईं। रस्मों के बाद वर पक्ष को उपहार दिए गए।

जयमाला में दुल्हन ने दुल्हे को हंसी-खुशी माला पहनाया। जयमाला के बाद दुल्हन पक्ष दुल्हे को शादी के मंडप में ले गए। पंडित ने सात फेरे लगवाए, सिंदूर दान व कोहबर तक की सारी रस्में पूरी हुईं और इस प्रकार विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न हुआ। सुबह में कोहबर के बाद विदागिरी की रस्म शुरू हो गई।

इसी दौरान दुल्हन ने दुल्हे के साथ जाने से मना कर दिया। कोहबर के रस्म में दूल्हा-दुल्हन क़ो एक कमरे में एकांतवास के लिए छोड़ा जाता है। इसके बाद दुल्हन की विदाई होती है। वास्तव में दूल्हा-दुल्हन के प्रथम मिलन को कोहबर कहा जाता है।

बताया गया कि दोनों परिवार वालों की रजामंदी से दुल्हा-दुल्हन पहले से परिचित थे। वे आपस में वीडियो कॉलिंग बात करते रहते थे। शुक्रवार के दिन बैंड-बाजे व 55 बरातियों के साथ भिट्ठा इलाके में बरात पहुंची। दरवाजे पर शहनाई बज रही थी। सुंदर पंडाल लगा हुआ था।

महिलाओं ने आचार्य के साथ दुल्हे का परीक्षण किया। बरातियों ने खूब उत्साह से नाच-गान किया। लजीज व्यंजन के लुत्फ उठाए। ग्रामीणों ने भी बरातियों का भव्य स्वागत किया। कहने लगी कि मैं इस लड़के के साथ नहीं जाऊंगी। लड़की पक्ष के लोगों ने नवविवाहित लड़के को जनवासा पर भेज दिया और बेटी की बिदागरी न होने की बात कह दी।

दुल्हन पक्ष का आरोप है कि दुल्हा मंदबुद्धि है। बेटी उसके साथ जाने से इनकार कर रही है। उधर, वर पक्ष का कहना है कि लड़का वर्षों से जयपुर में रहकर अच्छी नौकरी कर रहा है। मंदबुद्धि का आरोप निराधार है। स्वभाव से वह शांत जरूर है। लड़का पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर है।

Input : Dainik Jagran

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